भाई-बहन के पवित्र स्नेह का महापर्व हैं रक्षा बंधन

प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी रक्षा बंधन का पर्व हिन्दू पंचाग के हिसाब से श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन यानि की 26 अगस्त, रविवार को बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाएगा | रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन का पर्व है, बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है | भाई अपनी बहन को वचन देता है कि वह ताउम्र उसकी रक्षा करेगा,  इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसे सिर्फ हिन्दू ही नहीं, बल्कि अन्य धर्म के लोग जैसे कि सिख, जैन और ईसाई भी बड़े हर्षोल्लास के साथ इसे मनाते हैं | ज्योतिष गणना के अनुसार  25 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 16 मिनट से पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी जो 26 अगस्त की शाम 5 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। इस बार रक्षाबंधन पर धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा और पंचक प्रारम्भ हो जाएगा लेकिन इसका असर राखी बांधने में नहीं रहेगा। पंचक में शुभ कार्य किया जा सकता है।

इस वर्ष राखी बांधने का शुभ मुहूर्त काल 26 अगस्त, को सुबह 7:43 से दोपहर 12:28 बजे तक इसके बाद फिर दोपहर 2:03 से 3:38 बजे तक l रक्षा बंधन में एक आवश्यक नियम होता हैं कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधीनी चाहिए । इस वर्ष रक्षा बंधन में सबसे रोचक तथ्य यह हैं की भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी, और राखी के इस नियम का पूरी तरह से पालन भी हो जाएगा | इस प्रकार भाई बहन के इस पवित्र महापर्व को प्रेम और श्रद्धा पूर्वक मनाने से भाई बहन का संबंध आजीवन बना रहता है।

हमारा भारत वर्ष त्यौहारों का देश है । यहाँ विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाए जाते हैं । हर त्यौहार अपना विशेष महत्त्व रखता है । रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक त्यौहार है । यह पर्व  बहन और भाई की परंपरा का प्रतीक है । यह दान के महत्त्व को प्रतिष्ठित करने वाला पावन त्यौहार है । रक्षाबंधन पारिवारिक समागम और मेल-मिलाप बढ़ाने वाला त्यौहार है । इस अवसर पर परिवार के सभी सदस्य इकट्‌ठे होते हैं । विवाहित बहनें मायके वालों से मिल-जुल आती हैं, और उनके मन में बचपन की यादें सजीव हो जाती हैं । बालक-बालिकाएँ नए वस्त्र पहन कर  घर-आँगन में खेल-कूद करते हैं । इस तरह पारिवारिक संबंधों में प्रगाढ़ता आती है । लोग पिछली कडुवाहटों को भूलकर आपसी प्रेम को महत्त्व देने लगते हैं । रक्षाबंधन पारिवारिक समागम और मेल-मिलाप बढ़ाने वाला त्यौहार है ।

राखी की यह रीति बहुत पुरानी हैं इस बात का प्रमाण हमारे हिन्दू पुराणों में भी उल्लेख हैं, कहते हैं जब भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध किया था तब उनके हाथ में चोट आ गई थी तो उस समय बहन द्रोपदी ने उनके खून को बंद करने के लिए अपनी साडी का चीर फाड़ कर उनके हाथ में बांध दिया था और यह दिन श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था, तब भगवान श्री कृष्ण ने द्रोपदी की लाज बचाकर अपनी बहन के राखी का कर्ज चुकाया था | हिन्दू धर्म के हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई आशय जरूर छिपा रहता और हमे इन त्यौहारों से एक सीख जरूर मिलती हैं जिसे अपने इस जीवन में अवश्य उतारनी चाहिये | त्यौहार हमे सीखते हैं की हमे आपस के गीले-शिकवे भूल कर अपने परिवार और समाज में भाई-चारा कायम करना चाहिए और अपने इन भारतीय त्यौहारों को मनाने का लक्ष्य पूरा करना चाहिए |

राखी बांधते समय करें इस मंत्र का उच्चारण :-

येन बद्धो बलिराजा, दानवेन्द्रो महाबलः|

तेनत्वाम प्रति बद्धनामि रक्षे, माचल-माचलः||

रक्षा बंधन के इस पवित्र और पावन पर्व की सभी को अनंत शुभकामनाएँ और ढ़ेर सारी बधाई हम आप सभी के उज्जल भविष्य की ईश्वर से मंगल कामना करते हैं |

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