इस जन्माष्टमी करें संतानप्राप्ति यज्ञ.. जानें पूरी विधि

इस बार की जन्माष्टमी 2 सितंबर को पड़ रही है, इस बार का जन्माष्टमी का व्रत बहुत खास है। क्यूंकी इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर बहुत सुंदर योग बन रहे हैं, बिलकुल वैसे ही जैसे भगवान श्री कृष्ण के जन्म के वक्त था। इस योग को कृष्ण जयंती योग के नाम से जाना जाता है।

दरअसल इस बार जन्माष्टमी पर ऐसा योग बन रहा है जैसा द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के जन्म समय पर था, इस संयोग को हमारे शास्त्रों में श्री कृष्ण जयंती योग के नाम से जाना जाता है। कई सालों के बाद फिर ऐसा योग बना है।

अब आपको बताते हैं की क्या है श्री कृष्ण जयंती योग, दरअसल इस साल 2 सितंबर, रविवार को रात 8 बजकर 48 मिनट पर अष्टमी तिथि  लग रही है। निर्णय सिंधु नामक ग्रंथ के अनुसार, जब भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में आधी रात यानी बारह बजे रोहिणी नक्षत्र हो और सूर्य सिंह राशि में तथा चंद्रमा वृष राशि में हों, तब श्रीकृष्ण जयंती योग बनता है।

अब बात करते हैं संतान प्राप्ति यज्ञ की.

जो महिलाएं संतान प्राप्ति करना चाहती हैं, उनके लिए यह पूजा विशेष लाभदायक है। किसी भी कारणवश जो दंपत्ति संतान प्राप्ति नहीं कर पा रही हैं, उन्हें यह पूजा अवश्य करवानी चाहिए। विशिष्ट आचार्यों द्वारा सभी शास्त्रीय नियमों का पालन कर यज्ञ करवाने से संतान प्राप्ति की इच्छा जल्दी पूरी होती है।

अत्याधिक इच्छुक होने के बावजूद ग्रहीय बाधाओं के कारण दंपत्ति संतान सुख पाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर यज्ञ करवाकर आप विभिन्न ग्रहीय बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो दंपत्ति पूरे समर्पण के साथ भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं, उन्हें संतान सुख की प्राप्ति अवश्य होती है। जो दंपत्ति विभिन्न चिकित्सीय इलाज करवाने के बाद भी संतान ना हो पाने के दुख में हैं उनके लिए यह पूजा विशेष कारगर सिद्ध हो सकती है।

कैसे करें पुजा?

प्रसाद (नियमित रूप से पढ़ने के लिए संतान गोपाल पाठ की पुस्तक, बाल गोपाल की मूर्ति, मिश्री)

यज्ञ के दौरान आपको क्या करना है और क्या नहीं, और ज्योतिषीय मदद के लिए आप गुरुदेव जी॰डी॰ वशीष्ठ जी से इस पते पर सम्पर्क भी कर सकते हैं हमारा पता है 507, उद्योग विहार, फेस-3, गुरुग्राम, हरियाणा-120016  और आप हमको इस नंबर (0124-6674671)पर फोन भी कर सकते हैं।

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