जानिए क्‍या है अनंत चतुदर्शी?

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन अनंत के रूप में श्री हरि विष्‍णु की पूजा होती है तथा रक्षाबंधन की राखी के समान ही एक अनंत राखी होती है, जो रूई या रेशम के कुंकुम से रंगे धागे होते हैं और उनमें चौदह गांठे होती हैं। ये 14 गांठें, 14 लोक को निरूपित करते हैं और इस धागे को वे लोग अपने हाथ में बांधते हैं, जो इस दिन यानी अनंत चतुर्दशी का व्रत करते हैं। पुरुष इस अनंत धागे को अपने दाएं हाथ में बांधते हैं तथा स्त्रियां इसे अपने बाएं हाथ में धारण करती हैं।

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी का व्रत किया जाता है। यानी रविवार 23 सितंबर 2018 को अनंत चतुर्दशी व्रत का अनुष्ठान किया जा रहा है। इस खास दिन भगवान विष्णु की कथा का विशेष महत्व होता है। इसी दिन गणेश चतुर्थी पर स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन के बाद पंडालों में पूजन अर्चन को विराम दिया जाता है। ज्योतिषाचार्यो के मुताबिक इस व्रत के नाम से लक्षित है कि यह अनंत फलदायी है। शास्त्रों में इस व्रत को केवल पुरुष को ही रखने का विधान है।
भगवान सत्यनारायण के समान ही अनंत देव भी भगवान विष्णु का ही एक नाम है। ऐसी मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु का दिन है। इस दिन व्रत करने वाला व्रती यदि विष्‍णु सहस्‍त्रनाम स्‍तोत्रम् का पाठ भी करे, तो उसकी वांछित मनोकामना की पूर्ति जरूर होती है। इस बार घनिष्ठा नक्षत्र में अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जा रहा है। भक्ति भाव से श्रद्धालु भगवान श्री नारायण की पूजा करेंगे।

अनंत का मतलब है, जिसका कोई अंत नहीं। जो हमेशा से है और सदैव रहेगा अर्थात स्वयं भगवान नारायण। अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के पूजन का दिन है।
आज अनंत सूत्र धारण किया जाता है। यह एक पवित्र धागा होता है, जिसमें चौदह गांठें होती हैं।

भगवान सत्यनारायण के समान ही अनंत देव भी भगवान विष्णु का ही एक नाम है और इसी कारण अक्‍सर इस दिन सत्यनारायण का व्रत और कथा का आयोजन भी किया जाता है तथा सत्‍यनारायण की कथा के साथ ही अनंत देव की कथा भी सुनी-सुनाई जाती है।

आज का व्रत काफी पुण्यदायी होता है और घर में समृद्धि आती है। भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा है क‌ि जो इस कल्याणकारी व्रत को रखता है और अनंत भगवान की पूजा करके अनंतसूत्र को अपने बाजू में धारण करता है उसके सारे कष्ट और संकट अनंत भगवान दूर कर देते हैं।

शास्त्रों में बताया गया है कि अनंत चतुर्दशी के पूजन में व्रत रखने वाले को सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए। इसके बाद पूजा घर में कलश स्थापित करके कलश पर भगवान विष्णु का चित्र स्थापित करें। इसके बाद कच्चा धागा लें जिस पर चौदह गांठें लगाएं। इस प्रकार अनन्तसूत्र तैयार हो जाने पर इसे भगवान के पास रखें। अंनत सूत्र बाजार में भी तैयार क‌िया म‌िलता है आप चाहें तो इनका भी प्रयोग कर सकते हैं। जब यह तैयार हो जाए तब भगवान विष्णु के साथ अनंतसूत्र की षोडशोपचार-विधि से पूजन करें। इसके बाद “ॐ अनन्तायनम:” मंत्र का जप करते हुए अनंत भगवान की पूजा करनी चाहिए। पूजन के बाद पुरुषों को अनंत सूत्र दाएं बाजू में और महिलाओं को बाएं बाजू में बांधना चाहिए।

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