ज्योतिष के प्रति लोगों की बढ़ती लोकप्रियता

भारतीय ज्योतिष शास्त्र एक ऐसा विज्ञान हैं, जो अपने आप में ही अद्भुत रहस्यों का समावेश कीये हुए हैं l पुरातन काल से ही हमारे महर्षियों ने इसी ज्योतिष विद्या के माध्यम से भूत , भविष्य की घटनाओ के बारे में हमे पहले से ही अवगत करा देते थे l यह पूरी विदध्या हमारे 9 ग्रहों और 27 नक्षत्रों को आधार मान कर इसका पूरा अध्ययन किया गया हैं l पूरा समाज इन्हीं ग्रहों और नक्षत्रों के  संपर्क में ही रहकर अपने दैनिक जीवन का कार्यों का सम्पादन करता हैं l नभ मण्डल के सभी ग्रहों का प्रभाव पूरे समाज पर उनकी दशा से हिसाब से ही पड़ता हैं l

प्राचीन काल का सबसे बड़ा और विश्वसनीय विज्ञान हमारा ज्योतिष विज्ञान हैं इस विज्ञान को वेदों का नेत्र भी कहा गया हैं इसे हम ऐसा भी कह सकते हैं की अगर वेद हमारे शरीर हैं और शरीर बिना नेत्र के किसी काम का नहीं होता हैं ठीक उसी प्रकार वेद भी बिना ज्योतिष से अधूरे ही साबित होंगे  l समाज के सारे क्रिया-कलापों के लिए ज्योतिष एक बहुत  बड़ी आवश्यकता बन चुकी हैं l आपके सुबह उठने से रात सोने तक हर मुहूर्त को जानने के लिए आपको ज्योतिष की आवश्यकता पड़ती हैं l इन्हीं सभी जरूरतों को देखकर यह समाज पूर्ण रूप से ज्योतिष के ऊपर ही निर्भर हो गया हैं l

इंसान के जन्म से लेकर मरण तक बिना इसके कुछ भी संभव नहीं हैं l हम यह नहीं कहते हैं की सिर्फ हिन्दू समाज में ही ज्योतिष को माना या फिर जाना जाता हैं अलग-अलग समाजों में भी इसका महत्व देखने को मिलता हैं, बस इसके तरीके बदले हुए हैं l हिन्दू धर्म के अनुसार इस समाज में 16 संस्कारो का विधान हैं इन सभी संस्कारों का प्रतिपादन ज्योतिष की ही शाखा भारतीय हिन्दू कर्मकांड के माध्यम से किया जाता हैं l इसका प्रभाव लोगो पर तब ज्यादा बढ़ना शुरू हुआ जब इसकी बहुत सारी भविष्यवाणी पूर्णरूपेण सत्य साबित हुई l

समाज के कुछ लोगों ने इसे आय का साधन बनाने और अधिक लाभ कमाने के चक्कर में लोगों को तरह-तरह के झूठे सपने दिखाने लगे जिससे समाज में इसका बुरा असर भी देखने को मिला l कुछ दशको तक इसका महत्व कुछ फीका पड़ने लगा और समाज में इसको अंध-विश्वास के रूप में भी खड़ा किया गया लेकिन सच्चाई फिर भी लोगों से सामने उभर कर आई l लोग परेशान हुए , मुसीबते बढ़ी , वैवाहिक जीवन में बाधाए उत्पन्न हुई तब लोगों को इस चीज का एहसास हुआ की इस विद्या  में कुछ न कुछ तो जरूर हैं l

जैसे लोग कहने को कह देते हैं की भगवान नहीं हैं और फिर जब वो जीवन के सबसे खराब दौर से गुजरते है  तो उन्हे केवल भगवान का ही स्मरण रह जाता हैं l इसी प्रकार जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में मुश्किलों का सामना करता हैं तो केवल उसे सिर्फ और सिर्फ ज्योतिषी ही नज़र आता हैं l समाज के ये सभी अनुभव आज भी ये इशारा करते हैं की इस विज्ञान की धाक आज भी हमारे समाज में पहले जैसी बनी हुई हैं l

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