राष्ट्र बलिदान की प्रेरणा के स्त्रोत हैं बापू

देश के हर नागरिक के अंदर बापू का नाम सुनते ही मन मे एक अलग छवि जाग जाती हैं l हर व्यक्ति उनके विचारो को अलग-अलग प्रकार से अपने जीवन मे उतरता हैं l ये कोई नहीं जानता था की ये बालक देश का राष्ट्र पिता बनेगा पर बचपन से ही उनके अंदर कुछ ऐसे अद्भुत प्रतिभा और गुण थे  जिसकी वजह से उन्हे देश का सच्चा सेवक और देश का एक अहिंसावादी क्रांति वीर बना दिया l इस क्रांतिवीर का जन्म जन्‍म 2 अक्‍तूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्‍थान पर हुआ था, जिसे आज हम गांधी जयंती के प्रतीक के रूप मे मानते हैं

गांधी एक व्यक्ति नहीं बल्कि हमारे देश भारत के दर्शन और विचारधारा हैं, गांधी जी ने दर्शन के बारे में और जीवन की शैली के बारे में अपनी जीवन कथा सत् के साथ मेरे प्रयोग की कहानी में बताया है। गांधी जी ने भारत दर्शन के दौरान इस भारतीय समाज मे कुछ बुराइयाँ भी देखी, जिन्हें दूर करने के लिए गांधी जी ने बहुत प्रयास किये, उनके प्रयास कुछ हद तक सफल भी हुए लेकिन इन बुराइयों को पूरी तरह से मिटाया नहीं गया l जो हामरे समाज मे आज भी विद्धमान हैं l जैसे – सिद्धांतों के बिना राजनीति, परिश्रम के बिना संपत्ति , आत्‍म चेतना के बिना आनंद, चरित्र के बिना ज्ञान, नैतिकता के बिना व्‍यापार, मानवता के बिना विज्ञान, बलिदान के बिना पूजा इन सब के बिना आज भी सब कुछ अधूरा ही हैं l

महात्मा गांधी ने अपने जीवन काल के अधिकांश भाग मे जन आंदोलनो का भी कुशल नेतृत्व किया और इन आंदोलनों से समाज में वो काफी प्रिय हुये और साथ ही साथ आज़ादी का मूल मंत्र भी जाना की कैसे इस इसे प्राप्त किया जा सकता हैं l इन आंदोलनो में सत्याग्रह, लखनऊ समझौता , असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन आदि आंदोलन सामिल थे l

गांधी जी ने अपने जीवन के हर पहलू पर समाज को ध्यान में रखकर उसके उत्थान के लिए हर प्रकार के कार्य किए हैं चाहे वो नारी का सम्मान, नारी के अधिकार, समाज में नारी के स्थान के लिए वो हमेशा अग्रसर रहे हैं l उन्होने अपने जीवन में नारी को प्रधानता दी हैं l भारत के जीवन दर्शन में भी कहा गया हैं की यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते अर्थात नारी सभी जगह पूजनीय हैं, और हमारे समाज में उसके अधिकार भी समान हैं l गांधी जी पर्दा प्रथा से काफी दुखी थे क्यों की इस प्रथा से महिलाओ के अधिकारों के हनन की बात हैं l क्योंकि  उनका मानना था कि परदे के भीतर किसी भी पवित्रता को सुरक्षित कैसे कैद रखा जा सकता है। परदे की दीवार से उसकी रक्षा नहीं की जा सकती। उसे तो भीतर से ही पैदा होना होगा।

गांधी जी ने जहां अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया और उन्हे मिला क्या खाने को सिर्फ गोलियां ? जहा एक ओर गांधीजी ने अपने जीवन के 12 हजार 75 दिन स्वतंत्रता संग्राम में लगाए, परंतु उन्हें आजादी का सुकून मात्र 168 दिनों का ही मिला। गांधी जी के भौतिक शरीर का अंतिम दिन 30 जनवरी, 1948 को नाथु राम गोडसे के द्वारा तब्दील हो गया और भारत माता का सच्चा सपूत देश की रक्षा, मर्यादा और स्वाभिमान की रक्षा करते-करते अपने प्राणो का बलिदान दे बैठा l

अपने देश के खातिर बलिदान हुए इस सच्चे सपूत का ऋण देश कभी भी नहीं चुका पाएगा l यह ऋण देश के लिए युगों परियन्त रहेगा l अगर आज हम स्वतंत्र हैं तो इसमे हमारे बापू की भूमिका सर्वोपरी रही हैं l देश की नई पीढ़ी को महात्मा गांधी से बढ़कर कोई दूसरा बड़ा नायक नहीं मिल सकता। जो उनकी राह को सुगम और बेहतर बना सकता हो। गांधीजी के अनुसार शिक्षा ऐसी हो जो आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके जिससे समाज  आत्मनिर्भर बन सके तथा बेरोजगारी से मुक्त मिल सके l गाँधीजी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य, महज साक्षर होना नहीं बल्कि शिक्षा का उद्देश्य, आर्थिक आवश्यकता की पूर्ति का जरिया होना चाहिये । यह तभी संभव है, जब शिक्षा प्रयोजनवादी विचारधारा पर आधारित होगी । शांति और सुख तब मिलेंगे, जब उसकी ग्रंथी खुलेगी, इसलिए डिग्री / सर्टिफ़िकेट से अधिक हमें व्यक्ति विशेष की योग्यता पर ध्यान देना चाहिये । यही शिक्षा का सच्चा महत्व होगा ।

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