हरतालिका तीज- सुहागिन महिलाओं के लिए काफी खास है ये पर्व, जानिए पूरी पूजन विधि

क्या है हरतालिका तीज…

हमारे हिन्दू धर्म में किए जाने वाले प्रमुख उपवासों में से एक माना जाता है हरतालिका तीज, जिसे महिलाएं बड़े ही श्रद्धा के साथ मनाती हैं। बता दें कि हरतालिका तीज व्रत को सभी व्रतों में सबसे बड़ा व्रत भी माना जाता है और इसे एक उत्सव की तरह लोग मनाते करते हैं। इस खास पर्व को लोग भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को ही करते हैं। इस साल यह व्रत 12 सितंबर को पड़ रहा है। इसे व्रत को  खासकर के शादीशुदा महिलाएं व कुंवारी लड़कियां दोनों ही सच्चे भाव के साथ करती हैं।

हरतालिका” शब्द का क्या है अर्थ

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती भगवान् शिव जी को अपने पति रूप में पाना चाहती थी, जिसके लिए उन्होंने कठिन तपस्या की थी लेकिन उस समय पार्वती जी की सहेलियों ने उन्हें अगवा कर लिया था। “हरत” का अर्थ है “अगवा करना” एवं “आलिका” का अर्थ है “सहेलियां” अर्थात सहेलियों द्वारा अपहरण करना ही हरतालिका कहलाता है और इसी कारण इस व्रत को हरतालिका का नाम दिया गया है। बता दें कि यह खास व्रत शिव जी जैसा पति पाने के लिए ही कुंवारी कन्याएं भी बड़ी श्रद्धा के साथ करती हैं।

आइए जानें हरतालिका तीज को करने का सही नियम

  • विशेष प्रकार के फूलों से सजा फुलेरा
  • गीली काली मिट्टी और बालू रेत
  • केले के पत्ते
  • सभी प्रकार के फल और फूल पत्ते
  • बेल पत्र, शमी पत्र, धतूरे का फल एवं फूल, अकांव का फूल, मंजरी
  • जनेऊ, लाल रंग का कालवा, वस्त्र
  • माता गौरी के लिए सुहाग का पूरा सामान
  • घी, तेल, दीपक, कपूर, कुमकुम, सिंदूर, अबीर, चन्दन, श्री फल, कलश
  • पंचामृत के लिए घी, दही, शक्कर, दूध शहद

हरतालिका तीज की पूजा विधि

  •   सबसे पहले पूजा के लिए मिट्टी और बालू रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की प्रतिमा बनाएं।
  • उसके बाद फुलेरा बनाकर उसे सजायें।
  • उसके अंदर रंगोली डालकर उसपर पट्टा या चौकी रखें।
  • चौकी पर सातिया बनाएं और उस पर थाली रखें।
  • अब उस थाल में केले के पत्ते रखें।
  • तीनो प्रतिमाओं को केले के पत्तों पर आसीत करें।
  • किसी लौटे या घड़े पर श्रीफल रखकर घड़े के मुख पर नाडा बांध दें।
  • व साथ ही उसपर सातिया बनाकर अक्षत चढ़ाएं और दीपक जलाएं।
  • कलश पूजन हो जाने के बाद श्री गणेश का पूजा करें।
  • और इसके बाद भगवान शिव का पूजन करें और फिर माता गौरी पर पूरा श्रृंगार चढ़ाकर उनका भी पूजन करें।
  • पूजन समाप्त होने के पश्चात् हरतालिका की कथा अवश्य पढ़ें।
  • उसके बाद आरती करें, जिसमे सबसे पहले भगवान गणेश की आरती, फिर शिव जी की आरती और फिर माँ गौरी की आरती गायें।
  • पूजा के बाद भगवान की परिक्रमा करके उनका आशीर्वाद लेना ना भूलें।
  • रात भर जागकर पांच पूजा व् आरती याद से करें।
  • प्रातःकाल आखिरी पूजा के बाद माँ गुजरी पर सिंदूर चढ़ाया जाता है, जिसे सुहागन स्त्रियां लेती है।
  • साथ ही ककड़ी व् हलवे का भोग भी लगाया जाता है जिसके बाद ककड़ी खाकर उपवास का पारण किया जाता है।

आप सभी को हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं।

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