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हमारे बारे में

भारत देश सनातन देश है। ये सबसे पुरानी सभ्यता होने के कारण यहा पर विज्ञान का विकास सबसे पहले चालू हुआ है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हर तरह का विज्ञान निकला। आर्युवेद, ज्योतिष और शुन्य का विकास भी यही से हुआ है। ये जो धरती है हमेशा से हमें संस्कृति, संस्कार और सभ्यता देती आई है और इसी में से ही ज्ञान उपजता आया है और ज्योतिष के माध्यम से ऐसे संस्कार मिले जिनसे हमे पता चला कि समाज के अंदर हमें रहना कैसे चाहिए, घर में कैसा रहना चाहिए, हमारे शरीर के अंदर क्या-क्या विकार उत्पन्न हो सकते है, कब-कब उत्पन्न हो सकते है और उनके इलाज क्या-क्या करने चाहिये। ग्रहो की गणना करके हम ये भी जान पाये कि किस इंसान के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है। ये ज्ञान बहुत बडा विज्ञान था जो कि अठारहवी सदी से एक तरह का लुप्त होना शुरू हुआ। जैसे - जैसे समय बितता गया और ये इक्कीसवीं सदी आ गई और ज्योतिष पर विश्वास करने वाले बहुत काम लोग रह गए। लुप्त होता हुआ विज्ञान के कारण नई पीढ़ी में हमारी संस्कृति और संस्कार की कमी देखने को मिल रही है तब गुरुदेव जी. डी वशिष्ठ जी ने शोध शुरू किया और शोध करके ये पता लगाया कि इसके कौन से हिस्से के अंदर क्या -क्या कमी है सभी कमियों को दूर करने में 11 साल लग गए लेकिन अब 11 सालो की तपस्या के बाद ऐसा साफ्टवेयर बनाया जो सटीक भविष्य बता सकता है।.

आज की भागती दौडती जिन्दगी में ज्यादातर लोग परेशान है। नौकरी व्यापार और कारोबार को लेकर बच्चे क्या करेगे और बच्चो का भविष्य कैसा होगा। माता -पिता की यही चिन्ता है जो कि सबसे बड़ा कारण होता है। पढ़ने-लिखने के बाद भी नौकरी नही मिलती, अपना खुद का काम करने के लिए पैसो की जरूरत होती है। सरकार भी स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है। लेकिन युवाओं के मन में सबसे बडा सवाल होता है कि बिना पैसे के कौन सा काम शुरू करे। आपकी इस सबसे बड़ी परेशानी दूर करने के लिए स्वरोजगार बढ़ाने और आपको स्वबलंबी बनाने के ऐस्ट्रोआर्मी का गठन किया है।

ऐस्ट्रोआर्मी का लक्ष्य अगले तीन साल के अंदर 12 लाख लोगो को जोड़ने का है और आने वाले सालो में देश के 30 करोड लोगो को जोडने मुहीम शुरू की है। ये मुहीम अब विदेश में भी फैलेगी और यादि सारे संसार की बात करे तो साढे़ सात सौ करोड लेागो को जोडने की मुहीम है। ये सॉफ्टवेयर सभी भाषा में उपलब्ध है। यह सॉफ्टवेयर विश्व की सभी भाषा में उपलब्ध होगा और पूरे विश्व को कम से कम देा से ढाई करोड लोगो को काम मिलेगा।

अगले पाच साल के अंदर कम से कम दो ढाई करोड लोग इस काम को कर रहे होगे और जो इस ऐस्ट्रो आर्मी के सैनिक बन के पूरे विश्व के अंदर इस भारत देश के इस अद्भुत विज्ञान को फैला रहे होगे और पूरा विश्व जानेगा की ये कितना बडा विज्ञान है और इस विज्ञान के कारण आज ये पुरा संभव हो गया कि आप अपने भविष्य को पूरी तरह जान ले। ये भी जाने की किसलिए धरती पर आये हो, कब दुःख आयेगा और कब सुख आयेगा। ये सब बाते बताने के लिए ऐस्ट्रोआर्मी के करोड़ो लोग होगे तो ये पूरा विश्व ही खुशहाल होगा।

भारत वर्ष के पंजाब जिले में जन्मे गुरुदेव जी.डी वशिष्ठ जी लाखों लोगों के भाग्य निर्माता और ज्योतिष के प्रकांड विद्वान हैं। गुरुदेव जी ने जीवन से निराश हजारों-लाखों लोगों के जीवन से दुखों को दूर करने का संकल्प लिया है एवं लाल किताब के जीर्णोंधार तथा लाल किताब को अग्रसर यानि आगे बढ़ाने में गुरुदेव जी तत्पर हैं। गुरुदेव जी की 14 वर्ष की उम्र में आंखों की रोशनी खो गयी थी एवं दोनों चक्षुपटल क्षतिग्रस्त हो गये थे । डॉक्टरों ने तो उम्मीद ही खो दी थी कि वह कभी भी अपनी आंखों की दृष्टि को हासिल कर पाएंगे। परन्तु गुरुदेव जी के जीवन में ऐसा एक चमत्कार हुआ की उनको किसी व्यक्ति ने लाल किताब के उपाय करने को कहा। जब गुरुदेव जी ने ये उपाय शुरू किए तो धीरे-धीरे उनकी आँखों की रोशनी पुनः वापिस लोटने लगी और गुरुदेव जी देखने में सक्षम होने लग गये । इस घटना से गुरुदेव जी को लाल किताब में पूर्ण विश्वास आ गया और उनका मन लाल किताब की विद्या को सीखने को किया । गुरुदेव वशिष्ठ जी ने 5 गुरुओं के सानिध्य में रह कर लाल किताब का पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया। गुरुजी ने पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर वैदिक और पवित्र ज्योतिषीय पुस्तकों की शोध शुरू की और ज्योतिष संबंधी पहलुओं के साथ अपने वास्तविक वैज्ञानिक तर्कशास्त्र से जोड़ा। गुरुदेव जी ने एक प्रसिद्ध खगोल ज्योतिषीय बनने का संकल्प लिया। मानव कल्याण के दुखित जनों की सेवा भाव पर लग गये ।