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वशिष्ठ ज्योतिष

1950-1960 दशकों में तमिल के एक ज्योतिष के. के. कृष्णमूर्ति जी जिन्होंने ज्योतिष का अध्ययन करते हुए यह पाया की जब वे गणनाये करते है और उन गणनाओ के आधार पर भविष्यवाणी करते है तो उसमे कई भविष्यवाणी गलत साबित होती है। उन्होंने जब इसके बारे में और ज्योतिष आचार्यो से चर्चा की और बताया की हमारी गणनाओ में कुछ गलतिया है और हमे इस पर और अध्ययन करना चाहिए तो काफी ज्योतिषियों ने उनकी इस बात का बहुत बड़ा विरोध किया परन्तु वे भी अपने धुन के पक्के थे और उन्हीने रिसर्च करते करते एक ऐसा ज्योतिष बनाया जिसमे उन्होंने Ruling planet नाम का एक तरीका बनाया जिससे की भविष्यवाणी कथन में हर तरह की सच्चाई आ सके। जैसे की कोई जिस वक़्त में कोई प्रश्न करता हुआ आता था तो उस वक़्त में लग्न का स्वामी देखा जाता था। प्रश्न करते समय चंद्र जिस नक्षत्र में होता था उसका स्वामी देखा जाता था और उस समय चंद्र जिस राशि में होता था उसका स्वामी देखा जाता था और हफ्ते का जो दिन हो उसका स्वामी देखा जाता था। यह चार Ruling planet कहलाते है। इस चार रूलिंग ग्रह को यह बताना बहुत आसान हो गया की आदमी जो प्रश्न कर रहा है उसका सटीक जवाब क्या होगा। इस तरह से के. के.कृष्णमूर्ति जी ने के. पी. ज्योतिष को जन्म दिया

ठीक इसी प्रकार 1990-2000 दसक में यही समस्या गुरुदेव जी. डी. वशिष्ठ जी के सामने आयी की उन्हें कई सवालो के जवाब सही तरह से नहीं मिलते थे। 1990 से ही इन सवालो के जवाब ढूंढने के लिए उनके द्वारा ज्योतिष को पढ़ा गया परन्तु उनकी खोज 2006-2007 में के. पी. को पढ़ने पर समाप्त हुई।

के. पी. ज्योतिष की खासियत है की वह केवल प्रश्न का का उत्तर देती है परन्तु गुरुदेव जी. डी. वशिष्ठ जी ने के. पी. के ज्योतिष में असूल में ज्यादातर बदलाव करके और पराशर ज्योतिष की राशि और भाव की गणनाओ को लेकर और लाल किताब की भविष्यवाणी को मिलाकर एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया जिसको बनाने में ग्यारह साल लगे जो इन तीनो पद्धतियों (पराशर, के. पी. और लाल किताब ) के आधार पर बताया गया और इतना सक्षम बनाया गया की धरती पर मौजूद हर इंसान की जन्म तिथि , जन्म समय और जन्म स्थान डालकर यह जाना जा सके की उस इन्सान की आत्मा कैसी है, कार्य शैली और स्वभाव कैसा है और उसके आधार पर वह अपने जीवन काल में किस प्रकार के सुख और दुःख से गुजरेगा और किस हद तक की उचाई व गिरावट अपने जीवन में प्राप्त करेगा। सिर्फ इतना ही नहीं लाल किताब ज्योतिष के आधार पर बहुत से नए उपाय बनाकर दुनिया को इसका बहुत बड़ा लाभ दिया। उन्होंने इस ज्योतिष का निर्माण करके इस ज्योतिष को वशिष्ठ ज्योतिष का नाम दिया। आप यह भी कह सकते है की (पराशर, लाल किताब और के. पी. ) उन तीनो माँओ के गर्भ से पूर्णतः सक्षम और उसी से गुणकारी वशिष्ठ ज्योतिष नाम के पुत्र का जन्म हुआ और अपने आप में इंसान के सुख और दुःख उसके जीवन में घटी घटना और इंसान की जिंदगी की हर हार जीत बताने में इतना सक्षम है की गुरुदेव कहते है की अगले 1000 साल तक इंसानो को वशिष्ठ ज्योतिष को मानना एक मज़बूरी होगी या यह कह सकते है की अपने जीवन के आधार को जानकर आसान बनाना हो तो इसको अपनाना हर इंसान के लिए बहुत जरुरी होगा।